विधानसभा चुनाव के बाद अब लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी सरकारें राज्यों के नियमों में बदलाव कर रही हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 साल बाद एक बार फिर से रिटायरमेंट की आयुसीमा को बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं।

प्रस्तावित बदलाव:

कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु 3 साल बढ़ाई जा सकती है।

यह बदलाव प्रदेश के 4 लाख से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्रभावित करेगा।

संभवतः लोकसभा चुनाव से पहले दोनों राज्यों में यह बदलाव लागू हो जाएगा।

फायदे:

सरकार को अनुभवी कर्मचारियों की सेवा का लाभ मिलेगा।

नौकरी के अवसरों में वृद्धि होगी।

कर्मचारियों को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।

विभिन्न श्रेणियों के लिए रिटायरमेंट आयु:

प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) के चिकित्सकों को 62 साल की उम्र में VRS का विकल्प मिलेगा।

यदि वे VRS नहीं लेते हैं तो 65 साल तक सेवा दे सकते हैं।

प्रशासनिक स्तर पर बैठे वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी 62 साल की उम्र में ही रिटायर होंगे।

लेवल 1, 2, 3 और 4 के चिकित्सा अधिकारियों की रिटायरमेंट आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाएगी।

उदाहरण:

डॉक्टर अजय कुमार 62 साल के हैं और पीएमएस में कार्यरत हैं।

वे VRS लेने का विकल्प चुन सकते हैं या 65 साल तक सेवा दे सकते हैं।

यदि वे VRS नहीं लेते हैं तो उन्हें 3 साल तक 62 साल की उम्र के बाद मिलने वाले वेतन और भत्तों का लाभ मिलेगा।

यह निर्णय प्रशासनिक स्तर पर बैठे वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों पर लागू नहीं होगा।

यह बदलाव कई राज्यों में पहले से ही लागू है।यह बदलाव सरकार और कर्मचारियों दोनों के लिए फायदेमंद होगा।यह बदलाव देश के विकास में योगदान देगा।यह बदलाव नौकरी के अवसरों में वृद्धि करेगा।यह बदलाव कर्मचारियों को लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।

यह बदलाव सरकार के खर्च को कम करेगा।यह बदलाव देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।यह बदलाव सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाएगा।यह बदलाव देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।यह बदलाव देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।यह बदलाव लागू होने के बाद सरकार और कर्मचारियों दोनों को ही इसका फायदा मिलेगा।यह बदलाव देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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