बिहार में शराबबंदी पिछले कई सालों से हैं। लेकिन अब बिहार में भी गुजरात मॉडल की शराबबंदी करने के लिए मांग उठाई जा रही है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि गुजरात में शराब बंदी का क्या मॉडल है और वो बिहार से किस तरह से अलग है।

बता दें कि ये मांग किसी और ने नहीं बल्कि नीतीश कुमार की सरकार में शामिल उनकी सहयोगी पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने उठाई। जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार में शराबबंदी करने का तरीका कोई सही तरीका नहीं नहीं है। इस वजह से गरीबों को बहुत प्रताड़ित होना पड़ता है। उन्होने आगे कहा कि जिस तरह से गुजरात में परमिट के जरीए चुनिंदा लोगों को शराब दिया जाता है वैसे ही बिहार में भी होना चाहिए।

आइए जानते हैं बिहार की शराब बंदी और गुजरात की शराब बंदी में क्या अंतर है?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बिहार की तरह गुजरात भी ड्राई स्टेट है। हालंकि बिहार और गुजरात के शराबंदी कानून में थोड़ा अंतर है। बिहार में बहुत सख्त शराब बंदी है यानि कि यहां पर किसी को भी शराब पीने की अनुमति नहीं है। वहीं पर गुजरात में खास लोगों को शराब पीने की अनुमति है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गुजरात में बाहरी लोगों और पर्यटकों के लिए शराब पीने की इजाजत है लेकिन केवल बंद कमरों में ही। सार्वजनिक स्थान पर नहीं। इसके अलावा डॉक्टरी सलाह पर भी कुछ लोग शराब पी सकते हैं।