नागरिकता कानून को लेकर कांग्रेस-शिवसेना में दरार?

नई दिल्‍ली: सीएए और एनआरसी पर शिवसेना और कांग्रेस में मतभेद की खबरें सामने आन लगी हैं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने उद्धव के बयान पर उठाए सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने कहा कि ‘उद्धव ठाकरे को CAA पर ब्रीफिंक की जरूरत है। अगर आप NPR करते हैं तो NRC से नहीं रोक सकते। संविधान के हिसाब से CAA को फिर से समझने की जरूरत’ है, ‘धर्म नागरिकता का आधार नहीं हो सकता।

मनीष तिवारी में अपने ट्वीट अकाउंट पर लिखा, ”महाराष्‍ट्र के सीएम उद्ध्‍व ठाकरे को सीएए पर नियम 2003 के हिसाब से ब्रीफिंग की जरूरत है। उनको यह समझना चाहिए कि एनपीआर से एनआरसी की बुनियाद कैसे पड़ेगी। एक बार जब आप एनपीआर कर लेते हैं तो एनआरसी को नहीं रोक सकते। संविधान के हिसाब से सीएए को फिर से समझने की जरूरत है।”

दरअसल महाराष्‍ट्र के सीएम और शिवसेना के मुखिया उद्ध्‍व ठाकरे ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि सीएए को लेकर किसी को डरने की जरूरत नहीं है। उस वक्‍त भी मैंने कहा था कि यह कानून किसी को देश से निकालने के लिए नहीं है, मैंने अपने प्रदेश के सभी नागरिकों को यह वादा किया है कि किसी के भी अधिकार को छीनने नहीं दूंगा। सीएए आ गया तो किसी को डरने की जरूरत नहीं है। एनआरसी को लेकर भी मुसलमानों को डराया जा रहा है, जो सही नहीं है। यह हिंदू और मुसलमान सभी के लिए है और इसके लिए सभी लोगों को कतार में खड़ा होना पड़ेगा। जो भी लोग सीएए और एनआरसी के नाम पर लोगों को भड़का रहे हैं, उनको यह समझने की आवश्‍कता है।

आपको बता दें कि महाराष्‍ट्र में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाई है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि कांग्रेस और शिवसेना की राय सीएए व एनआरसी पर अलग-अलग है तो क्‍या दोनों के बीच रिश्‍तों में तनाव पैदा हो सकता है। जानकारों की माने तो उद्ध्‍व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक घंटे की मुलाकात की और उसके बाद एक प्रेस कांफ्रेंस करके सीएए व एनआरसी पर अपना रुख साफ किया। हालांकि उद्ध्‍व ने सोनिया गांधी से भी एक घंटे मुलाकात की थी, लेकिन इसको लेकर उन्‍होंने कोई बयान नहीं दिया। अब कयास यह लगाए जा रहे है कि सीएए और एनआरसी पर शिवसेना का यही रुख रहता है तो आने वाले दिनों में उद्ध्‍व के लिए राह मुश्किल होगी।

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