नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल कीमत कम हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल डीजल के दाम आसमान छूते जा रहे है, जिससे आम लोगों की जेब पर भार बढ़ रहा है। हालत यह है कि देश के कुछ शहरों में तो पेट्रोल की कीमत ने शतक लगा दिया है। ऐसे में सबके मन में यह जानने की इच्छा होगी की आखिर पेट्रोल डीजल के दाम अचानक इतने क्यों बढ़ रहे हैं।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तेल कीमत में इजाफा होने की वजह बताई है। उन्होंने कहा कि तेल उत्पादक देश ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसका कम उत्पादन कर रहे हैं जिससे इसकी कीमत बढ़ रही है। प्रधान ने रविवार को असम के धेमाजी में कहा, ‘तेल की कीमतों में तेजी के दो मुख्य कारण हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार ने तेल का उत्पादन कम कर दिया है और तेल उत्पादक देश ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए कम उत्पादन कर रहे हैं। इसका खामियाजा उपभोक्ता देशों को उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि हम तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और ओपेक प्लस देशों से लगातार अनुरोध कर रहे हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए। उम्मीद है कि इसमें बदलाव होगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल में लगातार 12 दिन तक बढ़ोतरी हुई है और कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये के पार चली गई। प्रधान ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स को जायज ठहराते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें कोविड-19 महामारी के मद्देनजर विकास के कई काम कर रहे हैं। इसके लिए वे टैक्स कलेक्ट कर रहे हैं। विकास परियोजनाओं से रोजगार पैदा होता है।

– देश की तरक्की के लिए टैक्स जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘इसकी अन्य वजह कोरोना वायरस में मची त्राहि-त्राहि है। हमें विकास के कई काम करने हैं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारें टैक्स कलेक्ट करती हैं। विकास के कामों पर खर्च करने से रोजगार पैदा होंगे। सरकार ने अपना निवेश बढ़ा लिया है और इस बजट में पूंजीगत खर्च 34 फीसदी बढ़ाया गया है।

राज्य सरकारें भी अपना खर्च बढ़ाएंगी। इसलिए हमें इस टैक्स की जरूरत है लेकिन साथ ही संतुलन बनाने की भी जरूरत है। मुझे लगता है कि वित्त मंत्री और राज्य सरकारें इसका रास्ता निकाल सकती हैं।’ इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा था कि तेल की खुदरा कीमतों को जायज स्तर तक लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर कोई व्यवस्था बनानी होगी।

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