Skand Shashti 2020: Skand Shashti fasting, learn the full story today, worship such KarthikeyaSkand Shashti 2020: स्कंद षष्ठी व्रत आज जानें पूरी कहानी, करें ऐसे कार्तिकेय की पूजा

आज स्कंद षष्ठी (Skand Shashti) का व्रत है। आपको बतादें कि ये व्रत भगवान कार्तिकेय (Lord Kartikeya) के लिए रखा जाता है। ये व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन रखा जाता है। और 26 तारीख को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है।

आपको बतादें कि दक्षिण भारत (South India) के राज्यों में इस व्रत की खूब मान्याता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र हैं। स्कंद षष्ठी व्रत का मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

स्कंद षष्ठी व्रत का मुहूर्त

स्कंद षष्ठी प्रारम्भ – सुबह 7 बजकर 2 मिनट से (26 जून 2020)

स्कंद षष्ठी समाप्त – सुबह 5 बजकर 3 मिनट तक (27 जून 2020)

स्कंद षष्ठी व्रत विधि

सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई कर लें। इसके बाद आप स्नान कर व्रत का संकल्प लें। और गौरी और शिव जी के साथ भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद आप जल, मौसमी फल, फूल, मेवा, कलावा, दीपक, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूध, गाय का घी, इत्र से करें। कीर्तन-भजन और पूजा के बाद आरती करें।

ऐसे हुआ था भगवान कार्तिकेय का जन्म

आपको बतादें कि कुमार कार्तिकेय के जन्म का वर्णन पुराणों में ही मिलता है। साथ ही जब देवलोक में असुरों ने आतंक मचाया हुआ था, तब देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ा था। लगातार राक्षसों के बढ़ते आतंक को देखते हुए देवताओं ने भगवान ब्रह्मा से मदद मांगी थी। परंतु उस काल च्रक्र में माता सती के वियोग में भगवान शिव समाधि में लीन थे। इंद्र और सभी देवताओं ने भगवान शिव को समाधि से जगाने के लिए भगवान कामदेव की मदद ली और कामदेव ने भस्म होकर भगवान भोलेनाथ की तपस्या को भंग किया। तभी एक कबूतर गुफा में चला गया और उसने भगवान शिव के वीर्य का पान कर लिया।