Dhanvantari had to take a second birth to be called a deity?,

हमारे धर्म में हर एक वार को किसी ना किसी ना किसी भगवान का दिन होता है। इस दौरान हिंदू धर्म पुराणों में अलग-अलग देवताओं को अलग-अलग महत्व है। आपको बतादें कि जबग हम मुश्किल में होते है तो हम भगवान को याद करते है।

इस दौरान पुराणों में कहा गया है कि धन्वंतरि (Dhanvantari) को चिकित्सा (Medical Science) का देवता माना गया है और उन्हें देवताओं का डॉक्टर भी माना गया है। वहीं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धन्वंतरि का जन्म समुद्रमंथन (Samudra Manthan) से हुआ और वो श्री हरी विष्णु के प्रथम अंश हैं।

 

आपको बतादें कि धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर बाहर आए तो उन्होंने प्रार्थना करते हुए कहा था कि इस लोक में क्या काम और स्थान है, यह बता दें? अभी तुमको धन्वंतरि प्रथम के नाम से जाना जाएगा। बतादें कि हिस्से में देवताओ का भाग बंट चुका था।

ऐसे में देवताओं के पश्चात उत्पन्न होने के कारण आपको देव नहीं माना जाएगा। बतादें कि धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर बाहर आए तो आगे कहा कि जब तुम्हारा अगला द्वापर युग में होगा तो तुम धन्वंतरि द्वितीय के नाम से पूरे विश्व में जाने जाओगे और देवता भी कहलाओगे।

द्वितीय के नाम से आज पूरे विश्व में जाने जाते है और उनकी पूजा अर्चना भी होती है। साथ ही भगवान विष्णु ने आगे कहा कि जब तुम्हारा अगला द्वापर युग में होगा तो तुम धन्वंतरि द्वितीय के नाम से पूरे विश्व में जाने जाओगे।

बतादें कि काशीपति धन्व ने पुत्र प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की जिसपर शिवजी भगवान से उनको पुत्र के रूप में धन्वंतरि को दिया। भगवान धन्वंतरि की पूजा करने के लिए रोज नित्यकर्म और स्नान निपटाकर पूजन करने से वैद्यों यश प्राप्त होता है।

भगवान धन्वंतरि की पूजा करने के लिए रोज नित्यकर्म और स्नान निपटाकर पूजन करने से वैद्यों को चिकित्सा कार्य में निश्चित रूप से यश प्राप्त होता है और शरीर को रोगों से मुक्ति मिलती है.