8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है. चर्चा है कि 8वें वेतन आयोग पर बातचीत आगे बढ़ रही है. अगर 8वां वेतन आयोग लागू होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आएगा.

7वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों का मूल वेतन 18,000 रुपये है. सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर बड़ी भूमिका निभाता है. संशोधित मूल वेतन की गणना फिटमेंट फैक्टर के आधार पर पुराने मूल वेतन से की जाती है। वेतन आयोग की रिपोर्ट में फिटमेंट फैक्टर एक महत्वपूर्ण सिफारिश है.

ऐसे बढ़ेगी न्यूनतम बेसिक सैलरी

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुना रखा गया था. इसी आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में संशोधन किया गया. आंकड़ों पर नजर डालें तो 7वें वेतन आयोग में सबसे कम वेतन बढ़ोतरी हुई थी. हालांकि, बेसिक सैलरी बढ़ाकर 18000 रुपये कर दी गई. चर्चा है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को 3.68 गुना तक बढ़ाया जा सकता है. ऐसे में न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये से बढ़कर 26,000 रुपये हो सकता है.

वेतन आयोग में आपको वेतन वृद्धि कब मिली?

चौथा वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर

वेतन वृद्धि: 27.6%

न्यूनतम वेतनमान: 750 रुपये

वेतन वृद्धि: 31%

न्यूनतम वेतनमान: 2,550 रुपये

छठा वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर

फिटमेंट फैक्टर: 1.86 गुना

वेतन वृद्धि: 54%

न्यूनतम वेतनमान: 7,000 रुपये

7वां वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर

फिटमेंट फैक्टर: 2.57 गुना

वेतन वृद्धि: 14.29%

न्यूनतम वेतनमान: 18,000 रुपये

8वां वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर

फिटमेंट फैक्टर:?

वेतन वृद्धि:?

न्यूनतम वेतनमान:?

क्या आएगा आठवां वेतन आयोग?

सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या 8वां वेतन आयोग आएगा या नहीं? इसे लेकर दो तरह की चर्चाएं हैं. सरकारी सूत्रों की मानें तो सरकार अब अगले वेतन आयोग पर विचार नहीं करेगी. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करना संभव नहीं है. अब एक सिस्टम बन गया है. उस व्यवस्था को अचानक ख़त्म नहीं किया जा सकता. दूसरा बड़ा कारण यह है कि 8वां वेतन आयोग आने में अभी समय है. अगले वेतन आयोग की समयसीमा 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती है. ऐसे में अभी काफी समय है.

पे मैट्रिक्स पर कितनी बढ़ेगी सैलरी?

केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन पे मैट्रिक्स 1 में 26,000 रुपये से शुरू हो सकता है। इस क्रम में पे मैट्रिक्स लेवल-18 तक वेतन में बढ़ोतरी होगी। वेतन आयोग के चलन पर नजर डालें तो यह हर 8-10 साल में लागू होता है। इस बार भी इसे 1 जनवरी 2026 से लागू करने का दावा किया जा रहा है.

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